बस है तू
बस है तू
मैं से हम बने तो, वफ़ा का निशान बन गया
पा कर साथ दीवाना तेरा, फिर इंसान बन गया
मेरे दिल की इस बस्ती में, बस तेरा मकान बन गया
तू खिली धूप सी, मैं अंधियारे से अंजान बन गया
मेरी जान तू ही है, और मेरा ख्वाब बस है तू
हाँ... मेरे जीने का अंदाज़ बस है तू
दुनिया की उस रफ़्तार में, शोर एक तूफ़ान बन गया
तेरी खूबसूरत आँखों में, सुकूँ मेरा जहान बन गया
अक्सर सवालों से घिरा, जब मन परेशान बन गया
तेरा दीदार तेरे आशिक पर, रब का अहसान बन गया
मेरी जान तू ही है, और मेरी सोच बस है तू
हाँ... मेरे जीने की दुआ बस है तू
तेरे प्यार से, भरोसे से, मैं भी कुछ आलीशान बन गया
तेरी प्रीत में लिखा ये गीत, बस मेरी पहचान बन गया
तू मेरी ज़मीन, और मैं तेरा आसमान बन गया
तू हुई हमसफर, तो सफर जिंदगी का आसान बन गया
मेरी जान तू ही है, और मेरा जमीर बस है तू
हाँ... मेरे जीने का यकीन बस है तू
मिला तेरा सहारा तो, हर मंज़र सुहाना बन गया
तेरी आवाज़ में ढल के अमर, ये मेरा संगीत बन गया
हमारे आशियाने का, कितना हसीन ये अतीत बन गया
फ़साना वफ़ा और वादों का, आज एक मिसाल बन गया
मेरी जान तू ही है, और मेरी मुस्कान बस है तू
हाँ... मेरे जीने की वजह बस है तू
और हाँ...
मेरे जीने का... सबसे बड़ा...
मक़सद बस थी तू...
मक़सद बस है तू...
मक़सद बस रहेगी तू।
-अंकित।