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कवितायेँ

जुदाई ...

जुदाई

बिन तेरे हर लम्हा लगता साल है
कब मिलोगे ये दिल करता सवाल है
क्या कहूं कैसा मेरा हाल है

हो तुम दूर तो
भीगी अंखियाँ और भीगे गाल हैं
बस बिखरे हुए शब्द ना सुर ना ताल है

-अंकित.

जीवन कथा

जीवन कथा

कभी जन्नत कभी दोज़क,
कभी धूमिल कभी रौनक,
जिंदगी चलती जाती है,
कहानी लिखती जाती है
चलो कुछ याद रखते हैं,
और कुछ भूल जाते हैं

कहानी मेरे जीवन की
और जिक्र हो सिर्फ जन्नत का
कहानी मेरे जीवन की
और जिक्र हो सिर्फ रौनक का

मेरे दोज़क से वो पल,
मेरे जीवन के धूमिल क्षण,
कभी ना याद रखना तुम,
मेरी खुशियो को संग रखना,
गमो को भूल जाना तुम ...

-अंकित

करवाचौथ का व्रत

करवाचौथ का व्रत

मेरी दीर्घायू के लिए क्यूँ तू ये कठिन संस्कार करती है ...
जब जानती है मेरी हर ख़ुशी को बस तू ही साकार करती है ...

मेरी दीर्घायू के लिए क्यूँ करवाचौथ का व्रत हर बार करती है ...
जब जानती है मेरी उम्र तो बस तेरे साथ की दरकार करती है ...

-अंकित.

मदद !!!

मदद

किसी के दिल का दर्द जब तुझे छु जाए ..
किसी की तकलीफ से आँख जब तेरी भर आये ..

जटिल उसकी समस्या हो, ना तू हाथ अपना बढ़ा पाए ..
ना होना शर्मिंदा तू के हौसला अपनो से मिलता है ..

बाँट लेना उसका ग़म उसे शायद सुकून मिल जाए ..
दुआ करना खुदा से वो अपनी मदद आप कर पाए ..

-अंकित

आदर्श !!!

आदर्श

मैं अपने ईमान को कभी बिकने नहीं देता
खुद को अपनी नज़रों मैं कभी गिरने नहीं देता

इसलिए खुदा मेरी गैरत को कभी झुकने नहीं देता
मेरे जन्मदाता के इस आदर्श को मैं मिटने नहीं देता

अंकित.

दुआ ...

दुआ

बहुत खुदगर्ज़ होके,
खुदा से ये मांग रखता हूँ ...
जीवनसाथी के जन्मदिन पर मैं,
उसकी खुशनुमा जिंदगी की गुहार करता हूँ ...

ऐ रब जिसकी हर ख़ुशी,
मुझसे हो कर शुरू, मुझ पर ख़तम हो जाती है ...
मैं उसको हर सुख दे पाऊँ, आज बस यही फ़रियाद मैं करता हूँ ...

अंकित.

निंदिया !!!

निंदिया

नैनों में निंदिया है
पर मुख पे है इनकार ...

स्वप्नलोक की अभिलाषी है
पर खेलने की है गुहार ...

सोने चली है मेरी नन्ही परी
पर दो कहानी का लगान बनेगा सरकार ...

-अंकित.