मेरी मंजिल हो तुम
मेरी मंजिल हो तुम¶
मेरा हर गीत हर तराना हो तुम
मेरी हर सुबह की शुरुआत हो तुम
मेरी हर शाम का साहिल हो तुम
मेरी हर रात की मंजिल हो तुम
मेरा हर ख्वाब और सोच हो तुम
मैं हूँ बस इसलिए कि मेरी हो तुम
मेरी सूनी राहों का उजाला हो तुम
मेरे टूटते हौसलों का सहारा हो तुम
दुनिया की इस भीड़ में जो खो न जाए
मेरी पहचान का वो खूबसूरत किनारा हो तुम
मेरा हर गीत हर तराना हो तुम
मेरी हर सुबह की शुरुआत हो तुम
मेरा हर ख्वाब और सोच हो तुम
मैं हूँ बस इसलिए कि मेरी हो तुम
मेरी खामोशियों की जुबां बन गए हो
मेरी सूखी जमीं का आसमां बन गए हो
ढूंढता था जिसे मैं सदियों से दिल में
तुम वही सुकूं, वही दास्तां बन गए हो
धड़कन की हर एक रवां हो तुम
मेरी इस जिंदगी का निशां हो तुम
मैं अधूरी सी एक किताब हूँ जानाँ
और उस किताब का पूरा बयां हो तुम
मेरा हर गीत हर तराना हो तुम
मेरी हर शाम का साहिल हो तुम
मेरी हर रात की मंजिल हो तुम
मैं हूँ बस इसलिए कि मेरी हो तुम
मेरी हो तुम...
हाँ, मेरी हो तुम...
-अंकित।